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छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के बारे में संक्षिप्त विवरण

छत्तीसगढ़ राज्य में हस्तशिल्प का इतिहास काफी गौरवपूर्ण एवं समृद्धशाली रहा है। ”हस्तशिल्प विकास बोर्ड” का मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प के क्षेत्र में चहुंमुखी विकास, विस्तार, संरक्षण, संवर्धन एवं लुप्त हुएशिल्पों को प्रशिक्षण के माध्यम से पुनर्जीवित करते हुए अधिक से अधिक बेरोजगारों को प्रशिक्षण प्रदान करते हुए परम्परागत/गैर परम्परागत शिल्पियों को स्वरोजगार में स्थापित कर शिल्प और शिल्पकारों का निरंतर विकास करना है। प्रदेश में हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी संस्कृति को बनाए रखने तथा अधिक से अधिकलोगो को शिल्प रोजगार से जोड़ने तथा बाजार की समुचित व्यवस्था कर शिल्पकारों के बेहतरीन जीवन कामार्ग प्रशस्त करना बोर्ड का मुख्य उद्देश्य है।इस दिशा में बोर्ड निरंतर प्रयासरत रहा है। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड हस्तशिल्पियों के निरंतर विकास हेतु प्रशिक्षण, औजार उपकरण, कर्मशाला निर्माण, राज्यस्तरीय हस्तशिल्प पुरस्कार, हस्तशिल्प विकास योजनाओं हेतु अनुदान, प्रदर्शनी प्रचार-प्रसार, शिल्पियों को मासिक आर्थिक सहायता, शिल्पी डिजाईन विकास शिक्षा, कार्यशील पूंजी सहायता के अंतर्गत शिल्पियों को लाभांवित किया जाता है। बोर्ड हस्तशिल्प के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास विस्तार के माध्यम से शिल्पियों के उत्पाद में गुणात्मक सुधार लाने के साथ ही साथ नये हितग्राहियों को हस्तशिल्प में प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार में जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा संचालित योजनाएं -
  1. प्रशिक्षण योजना - स्तर प्रशिक्षण का प्रकार समयावधि शासन की योजना के अनुरूप प्रशिक्षण स्वरोजगार के लिए दिया जाता है। प्रशिक्षण इस स्तर का होना चाहिए कि शिल्पी खुले बाजार में अपने प्रतिद्वन्दियों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सके, इस हेतु प्रशिक्षण को अत्याधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न चरणों में आयोजित किया जाता है। स्तरप्रशिक्षण का प्रकार समयावधि प्रथम बुनियादि प्रशिक्षण 03 माह द्वितीय उन्नत प्रशिक्षण 04 माह तृतीय तकनीकी डिजाईन एवं कार्यशाला 02 माह प्रथम बुनियादि प्रशिक्षण 03 माह हस्तशिल्प विकास बोर्ड, द्वारा प्रदेश के परम्परागत/गैर परम्परागत शिल्पियों, कृशि व गैर कृशिसेक्टर के अल्पकालिक श्रमिक मजदूरों एवं शिक्षित बेरोजगार युवक एवं युवतियों को विभिन्न शिल्पां में प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। उपरोक्त प्रशिक्षण योजनाओं मेंराज्य शासन से प्राप्त बजट एवं विभागीय मापदण्डो के आधार पर प्रशिक्षणार्थियों का शिल्प में प्रशिक्षण के उपरांत छात्रवृत्ति एवं कच्चामाल प्रदाय किया जाता है।
  2. हस्तशिल्पियों का पंजीयन - हस्तशिल्प के क्षेत्र में पंजीयन एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसके पश्चात् शिल्पी विभागीय योजनाओं के अंतर्गत समस्त सुविधाओं से लाभान्वित होते है, साथ ही विभाग को पंजीकृत शिल्पियों की शिल्पवार जानकारी प्राप्त होती है। पंजीयन हेतु आवेदन पत्र संबंधित जिला कार्यालय में उपलब्ध होते हैं। वर्तमान में व्यापक स्तर पर पंजीयन की कार्यवाही करते हुए प्रत्येक माह प्रत्येक जिलों से पंजीयन की जानकारी प्राप्त की जा रहीं है।
  3. उन्नत औजार उपकरण सहायता - परम्परागत एवं प्रशिक्षित हस्तशिल्पियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए राशि रू. 5000/- तक की सीमा में औजार उपकरण अनुदान प्रदान किये जाते हैं। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के शिल्पियों के लिए 100 प्रतिशत अनुदान एवं पिछड़े/सामान्य वर्गों के शिल्पियों के लिए 75 प्रतिशत अनुदान की सुविधा है।
  4. कर्मशाला निर्माण सहायता - प्रदेश के परम्परागत एवं प्रशिक्षण प्राप्त हस्तशिल्पियों को जिनके पास शिल्पकार्य करने हेतु कर्मशाला नहीं है, ऐसे शिल्पियों को राशि रूपये 10,000/- तक की सीमा में कर्मशाला निर्माण अनुदान सहायता प्रदान की जाती है। अनुसूचित जन जाति/अनुसूचित जाति के हस्तशिल्पियों के लिए 100 प्रतिशत अनुदान एवं पिछड़े/सामान्य वर्गों के शिल्पियों के लिए 75 प्रतिशत अनुदान की सुविधा है। (घ) राज्य स्तरीय हस्तशिल्प पुरस्कार योजना - शिल्प की उच्च गुणवत्ता बनाये रखने की कड़ी में हस्तशिल्पियों को प्रतिस्पर्धात्मक रूप से ‘‘राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रतियोगिता चयन का आयोजन’’ प्रतिवर्ष किया जाता हैए जिसमें चयनित कलाकृति के निर्माणकर्ता शिल्पियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार राशि रूपये 25000 नगद, ताम्रपत्र, श्रीफल एवं शाल भेंट की जाती है।